भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर आज जारी हुए ताज़ा PMI (Purchasing Managers’ Index) सर्वे में संकेत मिले हैं कि जून 2026 के दौरान देश के प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ पिछले तीन महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में मांग की रफ्तार धीमी पड़ने से कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ा है।
क्या है गिरावट की वजह?
सर्वे के मुताबिक ग्राहकों की मांग पहले की तुलना में कमजोर रही, जिसके चलते कंपनियों के नए ऑर्डर की गति धीमी हुई। इसके साथ ही बिजनेस कॉन्फिडेंस भी जनवरी 2026 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, अर्थव्यवस्था अभी भी विस्तार (Expansion) के चरण में है, लेकिन उसकी गति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
कमजोर आर्थिक संकेतों और वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निवेशकों ने आईटी और बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली की। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में मांग में सुधार नहीं होता है, तो कंपनियों की आय (Earnings) और निवेश की गति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और घरेलू मांग मजबूत होती है, तो वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
