वैश्विक बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के ब्याज दरों पर सख्त रुख के कारण निवेशकों ने सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत 1.7% से अधिक टूट गई, जबकि चांदी में भी लगभग 4.7% की तेज गिरावट देखने को मिली।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ महीनों से सोना लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा था। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अगले महंगाई (PCE Inflation) के आंकड़ों और फेड की अगली मौद्रिक नीति पर टिकी हुई है।
आखिर सोना क्यों गिर रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों पर इस समय तीन बड़े कारक दबाव बना रहे हैं—
1. अमेरिकी डॉलर हुआ मजबूत
डॉलर इंडेक्स लगभग एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव आता है।
2. फेडरल रिजर्व का सख्त रुख
बाजार को उम्मीद है कि फेड इस साल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ऊंची ब्याज दरों के समय निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट की बजाय बॉन्ड और डॉलर में निवेश करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि गोल्ड में बिकवाली बढ़ रही है।
3. तेल की कीमतों में नरमी
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं। जब महंगाई का जोखिम घटता है तो निवेशकों की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग भी कमजोर पड़ सकती है।
चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर भी असर
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि अन्य कीमती धातुओं में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
- चांदी लगभग 4.7% गिरी।
- प्लैटिनम में 2.6% की कमजोरी।
- पैलेडियम भी करीब 2.4% फिसला।
भारत में क्या होगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह कमजोरी जारी रहती है और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं आता, तो आने वाले दिनों में घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, यदि डॉलर और मजबूत होता है या रुपये में कमजोरी आती है, तो भारतीय बाजार में गिरावट सीमित भी रह सकती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सोना अभी भी महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प माना जाता है। लेकिन अल्पकाल में फेड की ब्याज दर नीति और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े इसकी दिशा तय करेंगे।
Finbite Analysis
फिलहाल गोल्ड मार्केट पूरी तरह अमेरिकी फेड की अगली चाल पर निर्भर है। यदि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं तो सोने में दबाव बना रह सकता है। वहीं, यदि महंगाई में तेजी से कमी आती है या फेड का रुख नरम पड़ता है, तो सोने में दोबारा तेजी लौट सकती है।
