भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन टैरिफ, मार्केट एक्सेस और अमेरिकी जांचों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि भारत अमेरिका से अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ व्यवस्था चाहता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो भारतीय निर्यातकों को वियतनाम और अन्य एशियाई देशों के मुकाबले नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को कृषि, ऊर्जा और अन्य अमेरिकी उत्पादों के लिए अधिक खोले।
इस विवाद को और जटिल तब बना दिया जब अमेरिकी अदालतों ने ट्रंप प्रशासन की कुछ टैरिफ नीतियों पर सवाल खड़े किए। इससे पहले बनी कई व्यापारिक समझों की कानूनी स्थिति प्रभावित हुई और नई बातचीत का रास्ता कठिन हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता जल्द नहीं हुआ, तो भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, ऑटो पार्ट्स और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि भारत को विशेष टैरिफ राहत मिलती है, तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी जीत साबित हो सकती है।
फिलहाल दोनों देशों की सरकारें सकारात्मक बयान दे रही हैं, लेकिन अंतिम समझौते तक कई संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। निवेशकों और वैश्विक बाजारों की नजर अब इसी बात पर है कि क्या यह ट्रेड डील आर्थिक सहयोग का नया अध्याय लिखेगी या फिर टैरिफ विवाद और गहरा जाएगा।
